आज में बहुत दिन बाद हिंदी से एक पोस्ट लिखने जा रहा हु। मुझे ऐसा लाग रहा था की में मेरा राष्ट्र भाषा को भूल न जाऊ, इसलिए हिंदी से लिखने की दिल कर रहा था। कल दिल्ली कैपिटल की टीम ने आरामसे जितने वाले मैच को अंत में कड़ी मेहनत से जीत हासिल करना पड़ा । मैच लगभग हाथ से निकल चुका था। पहले खलील अहमद और बाद में राशिद खान ने दिल्ली कैपिटल को लगभग ध्वस्त कर दिया। इस स्थिति से ऋषव पन्थ ने दिल्ली शंस वापस ले आया 17 ओवर की समाप्ति पर दिल्ली का विजयी संयोजन काफी कठिन था। 18 गेंदों पर 34 रन चाहिए था। दिल्ली उस समय ऋषभ पंथ के ऊपर उम्मीद कर रहा था। अगर मैच जीतना है तो ऋषभ पंत को आपने हुनर दिखाना पड़ेगा। और उसने उसी समय थम्पी के ओवर से 22 रन आया और उसमे से २१ रन ऋषभ पंत के ।

जब वह 21 गेंदों में 49 रन बनाकर लौटे, तो दिल्ली को 7 गेंद में 5 रनों की जरूरत थी। जिस तरह से आप मैच खत्म नहीं होने पर नाराज होते हैं। उसे मैच के अंत तक आना सीखना होगा। अंतत: दिल्ली ने खून की गति बढ़ाकर जीत हासिल की। सनराइजर्स को टूर्नामेंट से बाहर कर दिया गया था। धोनी की चेन्नई सुपर किंग्स इस बार दिल्ली के सामने। जॉनी बेयरस्टो और डेविड वार्नर की कमी के कारण सनराइजर्स हैदराबाद पारी में रनो की गति नहीं आय थी, जिस गति से दो सलामी बल्लेबाजों ने रन बनाये थे उनकी कमी इस इनिंग्स में देखा गया था I अब दिल्ली कैपिटल अगर CSK की हरा देता है तो यह टीम मुंबई के साथ फाइनल खेलेंगे। अब यह देखना है की दिल्ली चेन्नई के मुकाबला कर सकता है या नहीं।

Quote - "Failure will never overtake me if my determination to succeed is strong enough".

Author- Og Mandino

With Regards @muchukunda