हेलो फ्रेंड्स, आज की समाचार में एक समाचार सबसे ज्यादा चर्चा हो रहा है, और वह चर्चा का विषय है महेंद्र सिंह धोनी । भारत के लिए एक दिवसीय क्रिकेट में 10,000 रन पूरे करने के बावजूद, महेंद्र सिंह धोनी की धीमी बल्लेबाजी के लिए सोशल मीडिया में धोनी आज आलोचना की पात्रो बन गया है । 93 गेंदों खेलने के बाद धोनी आज अर्धशतक तक पहुंचे। जो उनके वनडे करियर की दूसरी धीमी पारी है। लेकिन उस समय की हालत की हिसाब से रन से ज्यादा पारी संभालना ज्यादा जरुरी था। जो महेंद्र सिंह धोनी और रोहित शर्मा ने कर दिखाया।

रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2007 में, धोनी ने पिछले साल हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में एक दिवसीय क्रिकेट में अंतिम पचास रन बनाए थे। उन्होंने उस मैच में 87 गेंदों में कुल 65 रन बनाए थे । हालांकि, 2018 में उनके बल्ले में कोई पचास नहीं आया। अधिकतम 42 रन नॉट आउट रहे। परन्तु, 2019 की पहला और सिडनी की पहले वनडे में, धोनी पहुंचे 50 वें रन में । जो उनके करियर का 68 वां अर्धशतक है। हालाँकि, यह 50 रन 93 गेंद में आया है। इससे पहले, धोनी ने 2017 में वेस्ट इंडीज के खिलाफ नॉर्थ साउंड में 108 गेंदों पर 50 रन बनाए थे। यही उनका वन-डे करियर का सबसे धीमा पचास रन। शनिवार को सिडनी में, धोनी ने 96 गेंदें खेलकर 51 रन पर पवेलियन लोट गया है । उन्होंने तीन चौके और एक छक्के मारे है । फिर भी उनका आज की मैच की स्ट्राइक रेट बहुत ही ख़राब था, मात्र 53.12 जो ऑस्ट्रेलिया को पीछा करने के लिए बहुत काम था।

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यह सच है कि धोनी चार रन पर तीन विकेट आउट होने के बाद पांचवें नंबर पर क्रीज पर आए। पिछले नौ सालों में वह चौथे ओवर में पहली बार क्रीज पर आए। जनवरी 2010 में, ढाका में श्रीलंका के खिलाफ आखिरी बार, उन्हें चार ओवरों में बल्लेबाजी करने के लिए आना पड़ा था। परन्तु आज की मैच के हालत के अनुसार शुरुआत में उन्हें पारी सँभालने में अधिक ध्यान देना था। जो धोनी और रोहित शर्मा ने अच्छी तरह से अपना कर्त्यब्य निभाई थी। रोहित शर्मा के साथ उन्होंने चौथे विकेट पर 137 रन जोड़े और टीम को जीत की और ले गया था । लेकिन फिर भी सोशल मीडिया में सवाल उठ रहा है की वह इतनी डॉट बॉल क्यों खेल रहे थे । कुछ महीने बाद विश्व कप भारत-ऑस्ट्रेलिया के पहले एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय ने चिंता व्यक्त की है कि भारतीय मध्य क्रम कितना कुशल है।

अब भारतीय क्रिकेट बोर्ड को सायद चिंता होगा की विश्वकप के लिए मध्य क्रम बल्लेबाजी के लिए किस किसको चुना जा सकता है। क्युकी बाकि 12 इनका निर्णय लेना आवश्यक है। इस परिश्थिति में अगर महेंद्र सिंह धोनी का परफॉरमेंस इस तरह रहेगा तो भारतीय टीम के लिए अच्छा संकेत नहीं है। लेकिन मुझे पूरा विस्वास है की जब जब भारत संकट में पड़ा था तब तब धोनी भारतीयों टीम को बिस्वास के साथ अच्छा प्रदर्शन किया था। इसलिए धोनी कैसे भी खेले उनका विश्वकप में होना बहुत जरुरी है।

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