Cricket / sachin tendulkar

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4 भारतीय खिलाड़ी जिन्होने फैंस और मीडिया के दबाव मे लिया संन्यास,अगला टारगेट ये खिलाड़ी
भारत में क्रिकेट की पूजा होती है और क्रिकेटर भगवान की तरफ पूजे जाते हैं। यह सब तभी तक होता है जब टीम जीत रही हो। जैसे ही टीम मैच हारने लगती है वैसे ही सब उल्टा होने लगता है। पहले जहां हार के बाद खिलाड़ियों के घरों पर पथराव होते थे वहीं अब उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जाता है। आज के इस सोशल मीडिया के दौर में बड़े से बड़ा खिलाड़ी आए दिन ट्रोल होते रहता है। चाहे वह भारतीय कप्तान विराट कोहली हो या दिग्गज महेंद्र सिंह धोनी। पिछले कुछ समय में टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का बल्ले से कुछ खास प्रदर्शन नहीं रहा है। इस वजह से उन्हें काफी आलोचना झेलनी पड़ रही है। उनपर संन्यास लेने का दबाव भी बनाया जा रहा है। यह दबाव न सिर्फ मीडिया की तरफ से जबकि फैंस की तरफ से बनाया जा रहा है। इससे पहले भी कई दिग्गज खिलाड़ी इन्हीं दबावों की वजह से संन्यास ले चुके हैं। आज हम आपको ऐसे ही 4 खिलाड़ियों के बारे में बताते हैं: 4. सौरव गांगुली Source भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने 2008 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हुई सीरीज के बाद क्रिकेट से संन्यास ले लिया था। दादा पहले ही वनडे टीम से बाहर थे और 2008 में श्रीलंका में हुई टेस्ट सीरीज में उनका बल्ला पूरी तरह खामोश रहा था। इसके बाद खेल प्रेमियों के बीच उनके संन्यास की बातें तेज हो गई थी। दादा ने उसके बाद घोषणा कर दी कि वह ऑस्ट्रेलिया सीरीज के बाद संन्यास ले लेंगे। हालांकि, कंगारुओं के खिलाफ सीरीज के पहले मैच में उन्होंने मैच बचाऊ पारी खेली वहीं दूसरे मैच में शतक भी बनाया। उसके बाद सभी को लगा कि वह संन्यास वापस ले लेंगे लेकिन दादा ने ऐसा नहीं किया। 3. वीवीएस लक्ष्मण Source भारतीय क्रिकेट के ‘फेब फोर’ में शामिल लक्ष्मण टेस्ट क्रिकेट में टेस्ट के महत्वपूर्ण बल्लेबाज थे। अपनी एलिगेंस के लिए मशहूर लक्ष्मण ने कई मौकों पर नीचे के बल्लेबाजों के साथ बल्लेबाजी कर टीम को हार से बचाया है और जीत भी दिलाई है। 2011 के इंग्लैंड दौरे में लक्ष्मण का बल्ला पूरी तरह खामोश रहा। 4 टेस्ट मैचों की सीरीज में उनके बल्ले से मात्र 182 रन निकले। इसके बाद 2011-12 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भी वेरी वेरी स्पेशल के बल्ले से 4 टेस्ट में सिर्फ 156 रन निकले। इसके उनपर क्रिकेट प्रशंसकों का दबाव बनने लगा। इसके बाद लक्ष्मण से 2012 न्यूज़ीलैंड सीरीज में चुने जाने के बाद भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया। 2. अनिल कुंबले Source भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे सफलतम गेंदबाज अनिल कुंबले भी अपने करियर के अंतिम दौर में जूझते नजर आ रहे थे। इसके साथ ही उस समय टीम के कप्तान रहे कुंबले को ऊँगली की चोट भी परेशान कर रही थी। 2008 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उन्हें अपने घरेलू मैदान बेंगलुरु में भी विकेट नहीं मिला। अपने करियर के अंतिम 5 पारियों में से 4 पारियों में उन्हें एक भी विकेट नहीं मिला था। इसके बाद मीडिया में उनके संन्यास लेने की चर्चा होने लगी। इसके साथ ही महेंद्र सिंह धोनी को टेस्ट मैचों में भी कप्तानी देनी की बात हो रही थी। कुंबले ने दिल्ली के मैदान पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज के तीसरे टेस्ट मैच के बाद ही संन्यास की घोषणा कर दी। ऐसा कम ही होता है कि कोई खिलाड़ी बीच सीरीज में संन्यास की घोषणा करे और वह भी टीम का कप्तान होते हुए। टीम के कप्तान होने के बाद भी मीडिया पर फैंस के दबाव में कुंबले को क्रिकेट से संन्यास की घोषणा करनी पड़ी। 1. सचिन तेंदुलकर Source क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर 2007 विश्वकप के बाद से लेकर 2011 विश्वकप तक शानदार फॉर्म में थे। इस दौरान उन्होंने कई बड़ी और मैच जिताऊ पारियां खेली। वह 2011 विश्वकप में भी भारत की तरफ से सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज थे। उसी विश्वकप में मास्टर ब्लास्टर ने अपना 99वां अंतरराष्ट्रीय शतक भी बनाया था। उसके बाद अगला शतक बनाने में उन्हें टेस्ट और वनडे मिलाकर 20 से ज्यादा पारियां लग गई। इसके अलावा सचिन ने अपने टेस्ट करियर की अंतिम 40 पारियों में एक भी शतक नहीं बनाया था। मीडिया में बात चलने लगी थी कि “सचिन तुम कब जाओगे”। इसके साथ ही फैंस के बीच भी सचिन के संन्यास की बात चलने लगी। इसके बाद उन्होंने अक्टूबर 2013 में अचानक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी। अब अगला टारगेट यह खिलाड़ी 😱 महेन्द्रसिंह धोनी Source महेंद्र सिंह धोनी के संन्यास के ऊपर एक बार फिर से बहस चल रही है और बोला जा रहा है कि धोनी को खुद ही टीम से बाहर हो जाना चाहिए क्यूंकि धोनी की वजह से युवा खिलाड़ी जगह नहीं ले पा रहे हैं. धोनी की वजह से कई दूसरे युवा और प्रतिभाशाली खिलाड़ी टीम इंडिया के अंदर जगह नहीं ले पा रहे हैं. यही कारण है कि अब फिर से बोला जा रहा है कि धोनी को इंडियन क्रिकेट टीम से खुद ही बाहर हो जाना चाहिए. धोनी पर सन्यास के दबाव का एक कारण यह भी है की पिछले कुछ समय में टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का बल्ले से कुछ खास प्रदर्शन नहीं रहा है। इस वजह से उन्हें काफी आलोचना झेलनी पड़ रही है। उन पर संन्यास लेने का दबाव भी बनाया जा रहा है। यह दबाव न सिर्फ मीडिया की तरफ से जबकि फैंस की तरफ से बनाया जा रहा है।
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